Kritysh

Tuesday, June 24, 2008

A snippet

रात्रि अधिक बीत गयी थी, अचानक विरजन को जान पडा कि कोई सामने वाली दीवार धमधमा रहा है। उसने कान लगाकर सुना। बराबर शब्द आ रहे थे। कभी रूक जाते फिर सुनायी देते। थोडी देर में मिट्टी गिरने लगी। डर के मारे विरजन के हाथ-पांव फूलने लगे। कलेजा धक-धक करने लगा। जी कड़ा करके उठी और महराजिन को बताया। महराजिन चतर स्त्री थी। समझी कि चिल्लाऊंगी तो सभी लोग जाग जायेंगे। उसने सुन रखा था कि चोर पहले सेंध में पांव डालकर देखते है तब आप घुसते है। उसने एक डंडा उठा लिया कि जब पैर डालेगा तो ऐसा तानकर मारूंगी कि टॉग टूट जाएगी। पर चोर न पांव के स्थान पर सिर रख दिया। महराजिन घात में थी ही डंडा चला दिया। खटाक की आवाज आयी। चोर न झट सिंर खीच लिया और कहता हुआ सुनायी दिया-‘उफ मार डाला, खोपडी झन्ना गयी’। फिर कई मनुष्यों के हॅसने की ध्वनि आयी और तत्पश्चात सन्नाटा हो गया। इतने में और लोग भी जाग पडे और शेष रात्रि बातचीत में व्यतीत हुई|

This is a small snippet from one of the many great stories written by Premchand. Actually the guy who was hit was husband of Virjan. A very beautiful girl who had just come after her Gauna . This guy, Kamla, was bigda hua. Good for nothing. His friends were also like him. Due to their bad habits they were not allowed in Kamla's house. That night he drank a lot and after *some* discussion he took his friends to his house.

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